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राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के प्रसिद्ध राजा थे जो सत्यव्रत के पुत्र थे। ये अपनी सत्यनिष्ठा के लिए अद्वितीय हैं और इसके लिए इन्हें अनेक कष्ट सहने पड़े। ये बहुत दिनों तक पुत्रहीन रहे पर अंत में अपने कुलगुरु वशिष्ठ के उपदेश से इन्होंने वरुणदेव की उपासना की तो इस शर्त पर पुत्र जन्मा कि उसे हरिश्चंद्र यज्ञ में बलि दे दें। पुत्र का नाम रोहिताश्व रखा गया.
11 months ago #kalyanicassette. राजा हरिश्चंद्र का परिचय और इतिहास Introduction and History of King Harishchandra in Hindi; सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी Story of Satyawadi Raja Harishchandra in Hindi.
इस पुस्तक में राजा हरिश्चन्द्र इकक्षवाकू वंश के प्रसिद्ध राजा थे. कहा जाता है कि सपने में भी वे जो बात कह देते थे उसका पालन निश्चित रूप से करते थे | इनके राज्य में सर्वत्र सुख और शांति थी. नकी पत्नी का नाम तारामती तथा पुत्र का नाम रोहिताश्व था. तारामती को कुछ लोग शैव्या भी कहते थे. Maharaja Harishchandra की सत्यवादिता और त्याग की सर्वत्र चर्चा थी.
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की आज में आपको सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कहानी सुनाने जा रहा हूँ। राजा हरिश्चंद्र सूर्यवंशी थे। भगवान श्रीराम ने इन्हीके कुल में जन्म लेने का एक कारन इन्हीके पुण्यकर्म थे।. 1. विश्वामित्र कि प्रतिज्ञा. 2. ऋषि वसिष्ठद्वारा सतर्क रहने कि सलाह. 3. विश्वामित्रद्वारा अयोध्या कि सीमाएं बंद. 4. अयोध्यावासी बाघों से भयमुक्त. 5. राजा हरिश्चंद्र का सपना. 6.
The film is based on प्राचीन काल में अयोध्या नगरी में एक महान और धर्मप्रिय राजा हुआ करते थे, जिनका नाम था हरिश्चंद्र। राजा हरिश्चंद्र सूर्यवंशी वंश के थे और उन्हें उनकी सत्यनिष्ठा, न्यायप्रियता और प्रजापालन के लिए जाना जाता था। उनके शासन में सभी लोग सुखी और संतुष्ट थे। हरिश्चंद्र ने अपने जीवन में हमेशा सत्य का मार्ग अपनाया और कभी भी धर्म के रास्ते से विचलित नहीं हुए.
सत्य; शाश्वत धर्म और सदाचार राजा हरिश्चंद्र की जीवनगाथा (जन्म, इतिहास और कहानी), आधारित फिल्मे | Satyavadi Raja Harishchandra Story, Biography and films based on him in Hindi. राजा हरिश्चंद्र का जन्म आज से लगभग 8, वर्ष पूर्व ( ईसा पूर्व) हिन्दू पंचांग के पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन सूर्यवंश में हुआ था.
कथा सागर | राजा हरिश्चंद्र कथा रात्रि में महाराजा हरिश्चन्द्र ने स्वप्न देखा कि कोई तेजस्वी ब्राह्मण राजभवन में आया है। उन्हें बड़े आदर से बैठाया तथा उनका यथेष्ट आदर-सत्कार किया। हरिश्चन्द्र ने स्वप्न में ही इस ब्राह्मण को अपना राज्य दान में दे दिया। जगने पर महाराज इस स्वप्न को भूल गए। दूसरे दिन महर्षि विश्वामित्र इनके दरबार में आए। उन्होंने महाराज को स्वप्न में दिए गए दान की.
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